RAMP कार्यक्रम
पाठ्यक्रम: GS2/शासन
संदर्भ
- पाँचवीं राष्ट्रीय MSME परिषद ने विश्व बैंक समर्थित RAMP कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की है।
रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (RAMP)
- RAMP एक विश्व बैंक समर्थित केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य MSMEs की बाज़ार, वित्त और प्रौद्योगिकी उन्नयन तक पहुँच को बेहतर बनाना है, तथा वर्तमान MoMSME योजनाओं की पहुँच को बढ़ाना है।
- उद्देश्य:
- MSME संवर्धन और विकास में केंद्र-राज्य सहयोग को तीव्र करना।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन हेतु वर्तमान MoMSME योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना।
- MSMEs के लिए प्राप्य वित्तपोषण बाज़ार को सुदृढ़ करना।
- क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) की प्रभावशीलता बढ़ाना, तथा MSEs के हरित पहल और महिला-स्वामित्व वाली MSEs के लिए गारंटी को बढ़ावा देना।
- MSEs को विलंबित भुगतानों की घटनाओं को कम करना।
- मुख्य लाभ: RAMP योजना MSMEs के प्रदर्शन को प्रौद्योगिकी उन्नयन, नवाचार, डिजिटलीकरण, बाज़ार पहुँच, ऋण, हरित पहल आदि को बढ़ावा देकर, राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सुदृढ़ करेगी।
स्रोत: PIB
हिम-कनेक्ट (Him-CONNECT)
पाठ्यक्रम: GS2/सरकारी पहल
संदर्भ
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) के विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (WSDS) के अंतर्गत नई दिल्ली में Him-CONNECT का आयोजन कर रहा है।
परिचय
- Him-CONNECT भारतीय हिमालयी क्षेत्र (IHR) के शोधकर्ताओं को स्टार्टअप्स, निवेशकों और नीति-निर्माताओं से जोड़ता है।
- यह राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन (NMHS) के अंतर्गत विकसित 24 से अधिक प्रौद्योगिकियों और नवाचारों को प्रदर्शित करेगा।
- यह मंच हिमालय-केंद्रित समाधानों के व्यावसायीकरण, बुनियादी परिनियोजन और व्यापक अपनाने को सुगम बनाने का लक्ष्य रखता है।
स्रोत: PIB
भारत-स्वीडन AI साझेदारी SITAC फ्रेमवर्क के माध्यम से
पाठ्यक्रम: GS2/अंतर्राष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान, इंडियाएआई मिशन और बिज़नेस स्वीडन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु स्टेटमेंट ऑफ़ इंटेंट(SoI) पर हस्ताक्षर किए।
परिचय
- यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधानों के विकास, अनुप्रयोग और परिनियोजन पर सहयोग हेतु एक संरचित ढाँचा प्रदान करता है, जिसमें औद्योगिक एवं सामाजिक परिणामों पर विशेष बल दिया गया है।
- दोनों देश मिलकर स्वीडन-भारत प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता गलियारा (SITAC) नामक एक समर्पित कार्यक्रम विकसित करेंगे।
- SITAC दोनों देशों की सरकारी एजेंसियों, उद्योग हितधारकों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के बीच संरचित सहभागिता को सुगम बनाने हेतु प्रमुख मंच के रूप में कार्य करेगा।
- यह साझेदारी इंडियाएआई मिशन के उद्देश्यों को, जो कंप्यूट, डेटा और प्रतिभा तक पहुँच के माध्यम से एक व्यापक राष्ट्रीय AI पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित है, स्वीडन की औद्योगिक नवाचार, उन्नत अनुसंधान एवं विकास तथा जिम्मेदार AI कार्यान्वयन की ताकतों के साथ संरेखित करती है।
स्रोत: PIB
मिशन सुदर्शन चक्र
पाठ्यक्रम: GS3/रक्षा
समाचारों में
- भारतीय प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा ने मिशन सुदर्शन चक्र के अंतर्गत उन्नत हथियार तकनीक और मिसाइल रक्षा पर रक्षा समझौते को बढ़ावा दिया है।
मिशन सुदर्शन चक्र की पृष्ठभूमि एवं आवश्यकता
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को पाकिस्तान से ड्रोन और मिसाइल खतरों का सामना करना पड़ा।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु सुदर्शन चक्र मिसाइल शील्ड की योजना 2035 तक मेक इन इंडिया के अंतर्गत बनाई गई है।
- इसका उद्देश्य आयरन डोम, आयरन बीम, एरो, डेविड्स स्लिंग जैसे उन्नत रक्षात्मक प्रणालियों को वर्तमान S-400, बराक और आकाश प्रणालियों के साथ एकीकृत करना है, जिससे भारत की सीमाओं एवं तटरेखाओं को कवर किया जा सके।
- आगामी भारत-इज़राइल MoU में रक्षात्मक एवं आक्रामक हथियार सहयोग दोनों शामिल हो सकते हैं।
सुदर्शन चक्र
- यह एक बहु-स्तरीय, स्वदेशी वायु रक्षा पहल है।
- इसका नाम भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य चक्र पर आधारित है, जिसे मिसाइलों, रॉकेटों, ड्रोन और स्वार्म हमलों से प्रमुख स्थलों की रक्षा हेतु डिज़ाइन किया गया है।
- इसमें दीर्घ-सीमा प्रणालियाँ (S-400 और प्रोजेक्ट कुशा), मध्यम-सीमा प्रणालियाँ (MRSAM/बराक-8), लघु-सीमा प्रणालियाँ (आयरन डोम) और भविष्य की लेज़र-आधारित हथियार प्रणालियाँ (आयरन बीमऔर DURGA-II) सम्मिलित हैं, जो ड्रोन एवं निम्न-ऊँचाई खतरों को लागत-प्रभावी ढंग से रोकने में सक्षम होंगी।
इज़राइल की भूमिका
- इज़राइल सुदर्शन चक्र में प्रमुख भागीदार है, जो उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर और सटीक तकनीक प्रदान करता है।
- आयरन डोम और आयरन बीम जैसी प्रणालियों हेतु तकनीकी हस्तांतरण मेक इन इंडिया पर केंद्रित है।
- इज़राइली AI भारत के राडार और सेंसर को एकीकृत कर वास्तविक समय में खतरे की पहचान और प्रतिक्रिया हेतु एकीकृत नेटवर्क बनाएगा।
स्रोत: FE
SUJVIKA पोर्टल
पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
संदर्भ
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के 40वें स्थापना दिवस पर “SUJVIKA” नामक AI-संचालित जैव प्रौद्योगिकी उत्पाद डेटा पोर्टल का शुभारंभ किया गया, जो भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में जैव प्रौद्योगिकी को एक प्रमुख चालक के रूप में रेखांकित करता है।
SUJVIKA पोर्टल के बारे में
- SUJVIKA एक व्यापार सांख्यिकी डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म है, जो प्रमाणित जैव प्रौद्योगिकी उत्पाद आयात डेटा को संरचित और सुलभ प्रारूप में प्रस्तुत करता है।
- यह पोर्टल जैव रासायनिक उत्पादों, औद्योगिक एंजाइमों और अन्य जैव प्रौद्योगिकी आयातों पर क्षेत्रवार अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
- यह शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग को उच्च-मूल्य एवं उच्च-आयतन आयातों की पहचान करने, आयात निर्भरता का आकलन करने तथा स्वदेशीकरण एवं अनुसंधान प्रयासों को प्राथमिकता देने में सक्षम बनाता है।
- पोर्टल साक्ष्य-आधारित योजना का समर्थन करता है और घरेलू जैव-निर्माण को सुदृढ़ करने हेतु सार्वजनिक–निजी भागीदारी को बढ़ावा देता है।
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था
- भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में लगभग USD 10 बिलियन से बढ़कर 2024 में USD 165.7 बिलियन हो गई।
- जैव प्रौद्योगिकी को आगमी औद्योगिक क्रांति का प्रेरक माना जा रहा है।
- जैव-स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में 100 से कम थी, जो वर्तमान में 11,000 से अधिक हो गई है।
- देश का लक्ष्य विकसित भारत दृष्टि के अंतर्गत 2047 तक USD 1 ट्रिलियन जैव-अर्थव्यवस्था प्राप्त करना है।
स्रोत: PIB
अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI)
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचारों में
- जर्मनी और भारत ने अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI) के अंतर्गत €20 मिलियन (लगभग ₹180 करोड़) की लार्ज ग्रांट परियोजना प्रारंभ की है।
अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI) के बारे में
- 2008 में स्थापित, IKI जर्मनी का अंतर्राष्ट्रीय जलवायु परियोजनाओं हेतु प्रमुख वित्तपोषण तंत्र है।
- यह 150 से अधिक साझेदार देशों में शमन, अनुकूलन और जैव विविधता प्रयासों का समर्थन करता है, जिनमें भारत, ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया एवं मेक्सिको सहित 14 प्राथमिक राष्ट्र शामिल हैं।
नई भारत-जर्मनी परियोजना: दायरा एवं लक्ष्य
- यह €20 मिलियन की परियोजना भारत के उच्च-जोखिम पारिस्थितिक तंत्रों पर केंद्रित है, जो दीर्घकालिक लचीलापन हेतु प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देती है।
- प्राथमिक क्षेत्र:
- हिमालय (हिमनद पिघलना और भूस्खलन)
- पश्चिमी घाट (जैव विविधता हॉटस्पॉट, वनों की कटाई का खतरा)
- उत्तर-पूर्व भारत (कटाव-प्रवण नाज़ुक भू-भाग)
- द्वीपीय पारिस्थितिकी तंत्र (जैसे अंडमान एवं निकोबार, समुद्र-स्तर वृद्धि के प्रति संवेदनशील)
भारत और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए रणनीतिक महत्व
- यह पहल भारत के जलवायु एजेंडा को सुदृढ़ करती है, विशेषकर बढ़ते जोखिमों, बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून और जैव विविधता ह्रास के बीच।
- यह NDC लक्ष्यों जैसे 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा प्राप्त करने का समर्थन करती है और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के हिमालय एवं सतत आवास जैसे मिशनों के अनुरूप है।
स्रोत: IE
CAFE-3 मानदंड
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
समाचारों में
- प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने हाल ही में 2027 के लिए प्रस्तावित CAFE-3 कार्बन उत्सर्जन मानदंडों की समीक्षा की, परंतु अंतिम निर्णय नहीं लिया।
CAFE मानदंड
- इन मानदंडों को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा 2017 में यात्री वाहनों से ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को विनियमित करने हेतु लागू किया गया।
- ये मानदंड पेट्रोल, डीज़ल, एलपीजी, सीएनजी, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर लागू होते हैं, जिनका वजन 3,500 किलोग्राम से कम है।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 की शुरुआत में इन्हें कठोर किया गया, तथा अनुपालन न करने पर दंड बढ़ाए गए।
- इसका उद्देश्य तेल पर निर्भरता और वायु प्रदूषण को कम करना है, साथ ही ऑटोमोबाइल निर्माताओं को CO₂ उत्सर्जन घटाने और EVs, हाइब्रिड तथा CNG वाहनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो पारंपरिक जीवाश्म-ईंधन वाहनों की तुलना में कम कार्बन-गहन हैं।
कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE)-3 मानदंड का मसौदा
- CAFE-3 मानदंड छोटे वाहनों के लिए रियायतें प्रस्तुत करते हैं और फ्लेक्स-फ्यूल तथा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देते हैं।
- हल्के वाहनों (909 किलोग्राम तक वजन और 1200 सीसी से कम इंजन क्षमता) के लिए पूर्व में दी गई 3.0 g CO₂/km छूट को हटा दिया गया है।
- ऑटोमोबाइल निर्माता लक्ष्य प्राप्त करने हेतु पूल बना सकते हैं।
- उत्सर्जन ढलान अब अधिक समतल है, जिससे भारी वाहनों के लिए सीमा कठोर हो गई है, जबकि छोटे वाहनों के लिए इसे आसान बनाया गया है।
स्रोत: TH
पीटलैंड्स
पाठ्यक्रम: GS3/पर्यावरण
संदर्भ
- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की दो बड़ी झीलें आसपास की पीटलैंड्स से हजारों वर्षों से संचित कार्बन को उत्सर्जित कर रही हैं, जो जलवायु स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।
पीटलैंड्स
- पीटलैंड्स स्थलीय आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जहाँ जल-जमाव की स्थिति पौधों की सामग्री को पूर्ण रूप से विघटित होने से रोकती है।
- परिणामस्वरूप, कार्बनिक पदार्थ का उत्पादन उसके विघटन से अधिक होता है, जिससे पीट का शुद्ध संचय होता है।
- ठंडे जलवायु में पीटलैंड वनस्पति मुख्यतः स्पैग्नम मॉस, सेजेस और झाड़ियों से बनी होती है, जबकि उष्ण जलवायु में घास-प्रजाति एवं काष्ठीय वनस्पति अधिकांश कार्बनिक पदार्थ प्रदान करती है।
- पीटलैंड्स प्रत्येक जलवायु क्षेत्र और महाद्वीप में पाए जाते हैं तथा 4.23 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं, जो पृथ्वी की स्थलीय सतह का 2.84% है।
- विश्व के लगभग 84% पीटलैंड्स को प्राकृतिक या निकट-प्राकृतिक अवस्था में माना जाता है।
- पीट संचय की प्रक्रिया के कारण, पीटलैंड्स कार्बन-समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो किसी भी अन्य स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में अधिक कार्बन का भंडारण और अवशोषण करते हैं।
स्रोत: DD
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संक्षिप्त समाचार 27-02-2026